भारत में एफडी चुनने से पहले 8 कारकों पर विचार करना चाहिए
हम भारतीयों के लिए निवेश का मतलब आज भी सबसे पहले बैंक की सुरक्षित जमा योजना ही होता है। शेयर बाजार चाहे जितना ऊपर चला जाए या कोई और योजना कितना भी मुनाफा दे दे। जो सुकून अपना पैसा बैंक में सुरक्षित रखने में मिलता है वह कहीं और बिल्कुल नहीं मिलता। लेकिन क्या आँख बंद करके किसी भी बैंक में पैसा लगा देना सही फैसला है। बिल्कुल भी नहीं। आज के समय में हर बैंक के नियम और शर्तें पूरी तरह अलग होती हैं। इसलिए अपना पैसा लंबे समय के लिए जमा करने से पहले कुछ बुनियादी बातों की पूरी जानकारी होना बहुत ज़रूरी है।
क्या आज के समय में सुरक्षित जमा योजना चुनना सही फैसला है
शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले लोग अक्सर इसका मजाक उड़ाते हैं। उनका सीधा तर्क होता है कि इसमें मुनाफा बहुत कम मिलता है। यह बात कुछ हद तक सही भी मानी जा सकती है। लेकिन हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि इसका मुख्य उद्देश्य रातों रात अमीर बनना बिल्कुल नहीं है। इसका असली काम आपके मेहनत के पैसे को सुरक्षित रखना और बुरे वक्त में आपके काम आना है।
बाजार के उतार चढ़ाव से इसे कोई फर्क नहीं पड़ता है। आपातकालीन स्थिति के लिए फंड बनाने और बिना जोखिम वाली बचत के लिए यह तरीका आज भी एकदम बेजोड़ है। अगर आप अपने निवेश को संतुलित करना चाहते हैं तो सारा पैसा जोखिम वाली जगह पर डालना बहुत बड़ी बेवकूफी हो सकती है। आपके कुल निवेश का एक तय हिस्सा बिल्कुल सुरक्षित जगह पर होना ही चाहिए। यह एक बहुत ही समझदारी भरा कदम है बशर्ते आप सही विकल्प और सही बैंक का चुनाव करें।
निवेश करने से पहले चेक करें ये आठ अहम बातें
1. सबसे पहले चेक करें मिलने वाली ब्याज दर
आज के डिजिटल दौर में सिर्फ अपने नियमित या वेतन वाले बैंक पर ही पूरी तरह से निर्भर न रहें। अलग अलग सरकारी और निजी बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करना अब बहुत ज्यादा आसान हो गया है। आम तौर पर बड़े सरकारी बैंकों में दरें थोड़ी कम देखने को मिलती हैं। वहीं दूसरी तरफ निजी बैंक ग्राहकों को अपनी ओर खींचने के लिए थोड़ा ज्यादा फायदा देते हैं।
अगर आप वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में आते हैं तो आपको सामान्य दरों के मुकाबले कुछ अतिरिक्त मुनाफा भी मिलता है। इसके अलावा छोटे वित्त बैंक बड़े बैंकों की तुलना में काफी ज्यादा रिटर्न देने का वादा करते हैं। लेकिन ज्यादा लालच में आने से पहले आपको उस बैंक की आर्थिक स्थिति के बारे में भी थोड़ी जांच पड़ताल कर लेनी चाहिए। आपको अपना कीमती पैसा वहीं लगाना चाहिए जहाँ सुरक्षा और मुनाफे का एकदम सही संतुलन मौजूद हो।
| बैंक का प्रकार | आम नागरिक के लिए दर | वरिष्ठ नागरिक के लिए दर |
| बड़े सरकारी बैंक | छह से सात प्रतिशत | सात से आठ प्रतिशत |
| बड़े निजी बैंक | सात से साढ़े सात प्रतिशत | साढ़े सात से आठ प्रतिशत |
| छोटे वित्त बैंक | आठ से साढ़े आठ प्रतिशत | साढ़े आठ से नौ प्रतिशत |
2. बैंक की सुरक्षा और उसकी विश्वसनीयता
हमेशा उसी बैंक में अपना पैसा लगाएं जो भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा पूरी तरह से मान्यता प्राप्त हो। बहुत से लोग थोड़े से ज्यादा मुनाफे के चक्कर में किसी अनजान सहकारी बैंक या मोबाइल ऐप में अपना पैसा डाल देते हैं। जब वह संस्था भाग जाती है तो वे लोग बाद में बहुत पछताते हैं। यहाँ आपको जमा बीमा नियमों के बारे में अच्छी तरह से जानना चाहिए। यह रिज़र्व बैंक की ही एक खास सुविधा है जो आम जनता की भलाई के लिए बनाई गई है।
इसके नियम के अनुसार अगर आपका बैंक किसी भी वजह से डूब जाता है या बंद हो जाता है तो हर ग्राहक का पांच लाख रुपये तक का अमाउंट पूरी तरह से सुरक्षित रहता है। इस पांच लाख की सीमा में आपका जमा किया गया मूलधन और उस पर मिला हुआ ब्याज दोनों पूरी तरह से शामिल होते हैं। इसलिए बिना जांचे परखे कहीं भी पैसा नहीं फंसाना चाहिए। अपने गाढ़े पसीने की कमाई को हमेशा सुरक्षित और भरोसेमंद हाथों में ही सौंपें।
| सुरक्षा के नियम | जरूरी बातें |
| बीमा कवर की सीमा | पांच लाख रुपये प्रति ग्राहक |
| कवर में क्या शामिल है | मूलधन और कमाया गया ब्याज दोनों |
| नियामक संस्था | भारतीय रिज़र्व बैंक |
अक्सर लोग अपना सारा पैसा एक ही बार में पांच या दस साल की लंबी अवधि के लिए बैंक में जमा कर देते हैं। वित्तीय मामलों के जानकारों के अनुसार यह एक बहुत बड़ी गलती साबित हो सकती है। अगर बीच में ब्याज दरें बढ़ गईं तो आप उस बढ़े हुए रेट का बिल्कुल भी फायदा नहीं उठा पाएंगे। इससे बचने के लिए पैसे को अलग अलग हिस्सों में बांटने की समझदारी भरी रणनीति अपनाएं।
इसका सीधा मतलब है कि सारा पैसा एक जगह ब्लॉक करने के बजाय उसे अलग अलग समय के लिए निवेश करें। जब एक साल वाली जमा राशि पूरी हो जाएगी तो आप उसे फिर से अगले तीन साल के लिए दोबारा निवेश कर सकते हैं। इससे आपके पास हमेशा नकदी बनी रहेगी और आप जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल भी आसानी से कर पाएंगे। लंबी अवधि में इसका बहुत बड़ा लाभ हर निवेशक को देखने को मिलता है।
| निवेश का तरीका | मैच्योरिटी का समय | सबसे बड़ा फायदा |
| पहला हिस्सा निवेश | एक साल के लिए | तुरंत जरूरत पड़ने पर काम आता है |
| दूसरा हिस्सा निवेश | दो साल के लिए | ब्याज दरों में बदलाव का लाभ मिलता है |
| तीसरा हिस्सा निवेश | तीन साल के लिए | लंबे समय में ज्यादा मुनाफा देता है |
4. समय से पहले पैसा निकालने की शर्तें

ज़िंदगी में आपातकालीन स्थिति या कोई बड़ी मुसीबत कभी भी दरवाजा खटखटा कर नहीं आती है। किसी भी तरह की मेडिकल इमरजेंसी या किसी और बड़ी ज़रूरत के समय आपको अपनी जमा राशि बीच में ही तोड़नी पड़ सकती है। इसलिए निवेश का प्लान बनाते समय पेनाल्टी या जुर्माने के नियमों को ज़रूर अच्छी तरह समझें। जब आप समय से पहले पैसा निकालते हैं तो बैंक आपसे एक तय जुर्माना हमेशा वसूलता है।
इसका मतलब यह है कि बैंक उस समय लागू दर में से कुछ हिस्सा कम करके आपको आपका पैसा वापस करेगा। कुछ बैंक अब बिना जुर्माने के पैसा निकालने की आधुनिक सुविधा भी देते हैं। इसमें आपके खाते में कम पैसा होने पर जमा राशि से पैसा अपने आप कट कर आपके खाते में तुरंत आ जाता है। इन सभी जरूरी सुविधाओं को पहले से समझ लेना बहुत फायदेमंद होता है।
| निकासी की शर्तें | बैंक के नियम |
| सामान्य जुर्माना चार्ज | आधा से एक प्रतिशत तक की कटौती |
| विशेष सुविधा | बिना तोड़े जरूरत का पैसा निकालने की छूट |
| टैक्स बचाने वाली योजना | पांच साल से पहले बिल्कुल नहीं तोड़ सकते |
5. आपको अपने मुनाफे का पैसा कब चाहिए
पैसा जमा करते समय हर बैंक आपसे स्पष्ट रूप से पूछता है कि आपको ब्याज का पैसा किस तरह से चाहिए। इसके लिए आपको मुख्य रूप से दो विकल्पों में से किसी एक को चुनना होता है। पहले विकल्प में आपका सारा पैसा और ब्याज समय पूरा होने पर एक साथ आपके खाते में आता है। इसमें ब्याज पर भी ब्याज लगता है जो कि लंबी अवधि के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है।
अगर आपको तुरंत पैसों की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं है तो यह सबसे अच्छा और सुरक्षित विकल्प माना जाता है। दूसरे विकल्प में आपको हर महीने हर तिमाही या हर साल मुनाफे का पैसा नियमित रूप से मिलता रहता है। जो लोग रिटायर हो चुके हैं और जिन्हें हर महीने एक तय आमदनी चाहिए उनके लिए यह तरीका एकदम सही साबित होता है। आपको अपनी व्यक्तिगत जरूरत के हिसाब से ही सही विकल्प का चुनाव करना चाहिए।
| पैसा मिलने का प्रकार | पैसा कब मिलता है | किसके लिए सबसे सही है |
| एकमुश्त विकल्प | सीधा समय पूरा होने पर | जो पैसे को लंबे समय तक बढ़ाना चाहते हैं |
| मासिक विकल्प | हर महीने खाते में आता है | रिटायर लोगों के रोजमर्रा के खर्च के लिए |
| तिमाही विकल्प | हर तीन महीने में मिलता है | जिन्हें बीच बीच में खर्चों के लिए पैसे चाहिए |
6. बढ़ती महंगाई दर से अपने रिटर्न की तुलना
जब भी आप कहीं निवेश करें तो देश की लगातार बढ़ती महंगाई दर को कभी भी नज़रअंदाज़ न करें। आपके निवेश का रिटर्न महंगाई दर से ज्यादा होना चाहिए तभी आपके पैसे की वैल्यू असल में आगे बढ़ेगी। इसे हम एक बहुत ही आसान से गणित से समझ सकते हैं। मान लीजिए बैंक आपको सात प्रतिशत का सालाना रिटर्न दे रहा है। लेकिन देश में महंगाई की दर छह प्रतिशत के आसपास चल रही है।
ऐसे में आपके पैसे की असली ताकत सिर्फ एक प्रतिशत ही ऊपर की तरफ बढ़ी है। लोग अक्सर टैक्स काटने के बाद बचे हुए रिटर्न की तुलना महंगाई से करना बिल्कुल भूल जाते हैं। इस योजना का मकसद सिर्फ पैसा सुरक्षित रखना है इसे रातों रात करोड़पति बनने का शॉर्टकट न मानें। हमेशा महंगाई को ध्यान में रखकर ही अपने पैसे के बढ़ने की उम्मीद रखें।
| मुनाफे का गणित | उदाहरण के लिए मूल्य |
| बैंक द्वारा दी गई दर | सात प्रतिशत |
| बाजार की महंगाई दर | छह प्रतिशत |
| आपका असली मुनाफा | केवल एक प्रतिशत |
7. टैक्स और टीडीएस से जुड़े सभी जरूरी नियम
टैक्स की बात आते ही बहुत से लोग घबरा जाते हैं लेकिन इसके नियम बहुत ही सीधे और सरल बनाए गए हैं। इस योजना से मिलने वाला मुनाफा पूरी तरह से टैक्स के दायरे में आता है। यह ब्याज आपकी सालाना आमदनी में जुड़ जाता है और फिर आप जिस भी स्लैब में आते हैं उसके हिसाब से आपको सरकार को टैक्स देना पड़ता है। अगर एक साल में आपका कुल मुनाफा चालीस हज़ार रुपये से ज्यादा हो जाता है तो बैंक अपने आप दस प्रतिशत पैसा काट लेता है।
वरिष्ठ नागरिकों के मामले में यह छूट की सीमा पचास हज़ार रुपये रखी गई है। अगर आपकी कुल सालाना आमदनी टैक्स छूट के दायरे में आती है तो आप अपने बैंक में संबंधित फॉर्म पंद्रह जमा कर सकते हैं। ऐसा करने से बैंक आपका पैसा बिल्कुल नहीं काटेगा और आपका पूरा मुनाफा आपको मिल जाएगा।
| टैक्स के नियम | सीमा और जरूरी फॉर्म |
| कटौती की सीमा | चालीस हजार रुपये सालाना |
| वरिष्ठ नागरिक सीमा | पचास हजार रुपये सालाना |
| कटौती से बचने का तरीका | फॉर्म पंद्रह भरकर बैंक में जमा करना |
8. जरूरत पड़ने पर सस्ते लोन की बेहतरीन सुविधा
यह हर बैंक का एक बहुत ही काम का फीचर है जिसके बारे में बहुत कम ग्राहकों को सही जानकारी होती है। मान लीजिए आपकी पांच साल की योजना चल रही है और आपको तीसरे साल में अचानक पैसों की भारी ज़रूरत पड़ गई। अब अगर आप इसे तोड़ेंगे तो आपको जुर्माना देना पड़ेगा और आपका बहुत आर्थिक नुकसान भी होगा। ऐसी स्थिति में आप अपनी उसी जमा राशि पर बैंक से बहुत ही आसानी से सस्ता लोन ले सकते हैं।
आपको अपनी कुल वैल्यू का नब्बे प्रतिशत तक हिस्सा लोन के रूप में तुरंत मिल जाता है। इस लोन पर बैंक बहुत कम ब्याज वसूलते हैं जो कि आपकी जमा दर से सिर्फ थोड़ा सा ज्यादा होता है। जैसे ही आपके पास पैसे आएं आप अपना लोन चुका दें और आपकी योजना पहले की तरह ही बिना रुके आगे भी चलती रहेगी।
| लोन सुविधा के फायदे | नियम और विवरण |
| लोन की कुल रकम | जमा मूल्य का नब्बे प्रतिशत तक |
| लोन की ब्याज दर | जमा दर से केवल एक या दो प्रतिशत ज्यादा |
| कागजी कार्यवाही | बहुत कम और एकदम आसान प्रक्रिया |
निष्कर्ष
अगर आप अपने भविष्य को पूरी तरह से सुरक्षित करना चाहते हैं तो यह योजना एक बेहतरीन वित्तीय हथियार है। लेकिन लालच में आकर किसी अनजान जगह या बिना नियम वाले ऐप में अपना मेहनत का पैसा बिल्कुल न डालें। हमेशा अपनी ज़रूरत अपने लक्ष्य और अपनी टैक्स देनदारी के हिसाब से ही निवेश का पूरा प्लान बनाएं।
जब भी आप इस तरह का विचार करें तो ऊपर बताए गए सभी आठ बिंदुओं को पूरी तरह से ध्यान में रखें। अलग अलग बैंकों की जांच करें और जरूरत पड़ने पर टैक्स बचाने वाले फॉर्म समय पर जमा करें। आपकी एक छोटी सी सावधानी आपके पैसों को न सिर्फ सुरक्षित रखेगी बल्कि आपको बिना किसी तनाव के बहुत ही शानदार रिटर्न भी देगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या छोटे या नए बैंकों में निवेश करना पूरी तरह से सुरक्षित है?
हां छोटे वित्त बैंकों में निवेश करना भी सुरक्षित है। ये बैंक भी भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा पूरी तरह से नियंत्रित होते हैं। इन बैंकों पर भी पांच लाख रुपये तक की बीमा गारंटी उसी तरह लागू होती है जैसे किसी बड़े सरकारी बैंक पर होती है। बस एक ही बैंक में पांच लाख से ज्यादा का अमाउंट रखने से हमेशा बचें।
2. टैक्स बचाने वाली योजना और सामान्य योजना में क्या अंतर होता है?
टैक्स बचाने वाली योजना में पांच साल का लॉक इन पीरियड होता है। इसका मतलब है कि आप किसी भी हालत में पांच साल से पहले अपना पैसा नहीं निकाल सकते हैं और न ही इसके बदले लोन ले सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको आयकर नियमों के तहत डेढ़ लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। सामान्य योजना में ऐसा कोई लॉक इन नहीं होता है।
3. क्या मुझे एक ही बैंक में बड़ी रकम जमा करानी चाहिए या अलग अलग जगह पर?
सुरक्षा के लिहाज से अपना सारा पैसा एक ही जगह रखना कभी भी अक्लमंदी वाला काम नहीं है। अगर आपके पास पंद्रह लाख रुपये हैं तो पांच पांच लाख रुपये तीन अलग अलग बैंकों में रखना ज्यादा समझदारी है। इससे हर बैंक में आपको पांच लाख रुपये वाली सुरक्षा गारंटी का पूरा फायदा आसानी से मिल सकेगा।
4. अगर बैंक ने मेरा पैसा टैक्स के रूप में काट लिया तो क्या वह डूब गया?
ऐसा बिल्कुल नहीं है। कटा हुआ पैसा आपके ही पैन कार्ड के तहत सरकार के पास जमा होता है। अगर साल के अंत में आपकी कुल इनकम टैक्स भरने की लिमिट से कम है तो आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करके अपना कटा हुआ पूरा पैसा वापस पा सकते हैं।
