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SCO के बाद पीएम मोदी के साथ यात्रा करना चाहते थे पुतिन, कार में 45 मिनट तक बात की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को चीन के तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट की मुख्य कार्यवाही समाप्त होने के बाद अपनी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक के लिए एक ही वाहन में यात्रा की। यह घटना न केवल दोनों नेताओं के बीच गहरे व्यक्तिगत रिश्ते को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में एक मजबूत संदेश भी देती है, खासकर उस समय जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के रूस से तेल व्यापार को लेकर कड़े टैरिफ लगा दिए हैं। यह टैरिफ भारत के निर्यात को प्रभावित कर रहे हैं, लेकिन भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को राष्ट्रीय हितों के आधार पर प्राथमिकता दी है। इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को फिर से उजागर किया है, जो दशकों पुरानी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस पल को साझा करते हुए एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने अपनी और पुतिन की एक साझा तस्वीर अपलोड की। पोस्ट में उन्होंने लिखा, “एससीओ समिट की कार्यवाही के बाद राष्ट्रपति पुतिन और मैं अपनी द्विपक्षीय बैठक के स्थान पर साथ में गए। उनसे होने वाली बातचीत हमेशा गहन और उपयोगी होती है, जो नई दिशाएं प्रदान करती है।” यह पोस्ट जल्दी ही वायरल हो गई, और दुनिया भर में लोगों ने दोनों नेताओं के इस करीबी रिश्ते की सराहना की। तियानजिन में एससीओ समिट का आयोजन चीन की मेजबानी में हुआ था, जहां विभिन्न सदस्य देशों के नेता वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए थे। इस समिट में सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहे।

सूत्रों से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन ने विशेष रूप से एससीओ सम्मेलन स्थल से द्विपक्षीय बैठक के लिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ यात्रा करने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने मोदी का इंतजार किया और लगभग 10 मिनट तक रुके रहे, ताकि दोनों नेता एक साथ जा सकें। यह बैठक तियानजिन के प्रतिष्ठित रिट्ज-कार्लटन होटल में आयोजित की गई थी, जो शहर के प्रमुख स्थानों में से एक है। सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि पुतिन का यह इंतजार और साथ यात्रा करने का फैसला दोनों नेताओं के बीच विश्वास और सम्मान को दर्शाता है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन ने मोदी के लिए विशेष रूप से इंतजार किया, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक दुर्लभ इशारा है।

“फिर दोनों नेता पुतिन की आधिकारिक कार में विभिन्न वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत करते हुए साथ गए। ये मुद्दे ऊर्जा व्यापार से लेकर यूक्रेन संकट और क्षेत्रीय स्थिरता तक फैले हुए थे। बैठक स्थल पर पहुंचने के बाद भी वे कार में ही बैठे रहे और लगभग 45 मिनट तक गहन चर्चा जारी रखी। रूसी स्रोतों के अनुसार, यह बातचीत करीब 50 मिनट तक चली, जिसमें दोनों ने अपनी-अपनी टीमों से जुड़ने से पहले व्यक्तिगत स्तर पर विचार साझा किए। इसके बाद दोनों नेताओं की पूरी द्विपक्षीय बैठक हुई, जो एक घंटे से अधिक समय तक चली,” सूत्रों ने विस्तार से बताया। एनडीटीवी की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार रूस की प्रसिद्ध ऑरस सेनेट लिमोजिन थी, जो एक भारी बख्तरबंद लग्जरी वाहन है। यह कार रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा के उच्च मानकों को पूरा करती है, जिसमें बुलेटप्रूफ कांच, विशेष टायर और उन्नत संचार प्रणाली शामिल हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, इस कार में यात्रा करना दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों का प्रतीक है।

पुतिन के इस कदम का गहरा महत्व और वैश्विक संदर्भ

पुतिन का यह इशारा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अमेरिका द्वारा भारत के रूस से तेल व्यापार की कड़ी आलोचना के बीच आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर आरोप लगाया है कि वह रूस से तेल खरीदकर पुतिन के यूक्रेन युद्ध को आर्थिक रूप से समर्थन दे रहा है। पिछले महीने, यानी अगस्त 2025 में, ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका जाने वाले भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया, जो एशिया में किसी भी देश पर लगाया गया सबसे ऊंचा टैरिफ है। द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, यह टैरिफ रूसी तेल खरीदने के लिए भारत को दंडित करने का प्रयास है, और इससे भारत के निर्यात पर भारी असर पड़ सकता है। रॉयटर्स की एक विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया है कि 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर लगभग 17 अरब डॉलर की बचत की है, लेकिन अब नए टैरिफ से भारतीय निर्यात पर 37 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। अल जजीरा ने उल्लेख किया कि 2024 में भारत ने अमेरिका को 87 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के सामान निर्यात किए, जो अब जोखिम में हैं। ये टैरिफ मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों को प्रभावित करेंगे।

अमेरिकी दबाव के बावजूद, भारत ने रूस से तेल व्यापार को जारी रखा है और स्पष्ट रूप से कहा है कि उसकी ऊर्जा आयात नीतियां राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित होंगी। नई दिल्ली ने इन अमेरिकी टैरिफ को “अनुचित, अनुचित और अविवेकपूर्ण” करार दिया है, और कहा है कि ये अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन करते हैं। भारत की विदेश नीति हमेशा बहुपक्षीय रही है, और वह पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस के साथ व्यापार जारी रख रहा है। डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, एससीओ समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी ‘भू-राजनीतिक धमकाने’ की निंदा की, जो अमेरिकी कार्रवाइयों की ओर इशारा करता है। भारत ने भी समिट में आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता की अपील की, और मोदी ने कहा कि भारत के 40 वर्षों के अनुभव से सीखते हुए सदस्य देशों को सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर ध्यान देना चाहिए।

भारत और रूस के बीच संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दुनिया के सबसे स्थिर और मजबूत रिश्तों में से एक रहे हैं। 2022 में यूक्रेन युद्ध छिड़ने के बाद, जब पश्चिमी देशों ने रूसी ऊर्जा आयात पर प्रतिबंध लगाए और कीमत कैप लगाई, तब भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बनकर उभरा। हालांकि, रूसी तेल की खरीद पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, बशर्ते सौदे पश्चिमी प्रतिबंधों के पैरामीटरों में रहें। दोनों देश अब रुपए-रूबल व्यापार तंत्र को और सरल बनाने पर काम कर रहे हैं, ताकि वैश्विक वित्तीय जटिलताओं के बीच अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम हो सके। यह तंत्र दोनों देशों को मुद्रा विनिमय की समस्याओं से बचाने में मदद करेगा।

रूस की सराहना और यूक्रेन संकट में भारत की भूमिका

इससे पहले, तियानजिन समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की, जहां पुतिन ने यूक्रेन संकट के समाधान में भारत की भूमिका की खुलकर सराहना की। पुतिन ने कहा कि वह “यूक्रेन संकट के समाधान के लिए चीन और भारत के प्रयासों की सराहना करते हैं,” जो एशियाई शक्तियों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। परंपरागत रूप से, ऐसे संघर्षों का समाधान पश्चिमी देशों के नेतृत्व में होता रहा है, लेकिन अब भारत और चीन जैसे देश सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं। मोदी ने भी समिट में एससीओ के लिए भारत की दृष्टि साझा की, जिसमें सुरक्षा, आर्थिक विकास, कनेक्टिविटी और नवाचार पर जोर दिया गया।

यह मोदी और पुतिन की अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स समिट के दौरान हुई मुलाकात के बाद पहली व्यक्तिगत बैठक है। उस समय भी दोनों ने यूक्रेन मुद्दे पर चर्चा की थी। हाल ही में, मोदी ने पुतिन से फोन पर बात की थी, जब पुतिन ने ट्रंप के साथ अलास्का में यूक्रेन शांति समझौते पर वार्ता की थी। ये मुलाकातें दोनों देशों के बीच निरंतर संवाद को दर्शाती हैं।

रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में बढ़ते कदम

दिन में पहले, प्रधानमंत्री मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ अनौपचारिक बातचीत की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जो एससीओ समिट के दौरान तीनों नेताओं के बीच हल्के-फुल्के और दोस्ताना पलों को कैद करती हैं। ये तस्वीरें कजान में ब्रिक्स समिट की याद दिलाती हैं, जहां भी ऐसा ही दृश्य देखा गया था।

नई तस्वीरों में पुतिन बाईं ओर, प्रधानमंत्री मोदी बीच में और शी जिनपिंग दाईं ओर नजर आ रहे हैं। तीनों नेता मुस्कुराते हुए और आराम से बातचीत करते हुए एससीओ फैमिली फोटो के लिए चल रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह अनौपचारिक हडल तीनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को दिखाता है। एक्स पर इन तस्वीरों को शेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “तियानजिन में बातचीत जारी है! एससीओ समिट के दौरान राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी के साथ विचारों का आदान-प्रदान कर रहा हूं।” टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि मोदी की ये तस्वीरें चीन में ट्रेंड कर रही हैं, और बैडू सर्च इंजन पर ‘मोदी’ टॉप सर्च में शामिल है, जो चीन में उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने पुतिन के साथ एक और तस्वीर शेयर की, जिसमें दोनों नेता गर्मजोशी से हाथ मिलाते और गले मिलते दिख रहे हैं। मोदी ने कैप्शन में लिखा, “राष्ट्रपति पुतिन से मिलना हमेशा खुशी की बात होती है!” यह तस्वीर दोनों के व्यक्तिगत रिश्ते की गहराई को उजागर करती है।

इसके अलावा, एक अन्य दिलचस्प पल में प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पास से गुजरते हुए नजर आए। दोनों नेता एक-दूसरे से गहन अनौपचारिक बातचीत में व्यस्त थे, जबकि शरीफ अकेले खड़े होकर उदास चेहरे के साथ उन्हें देख रहे थे। यह घटना एससीओ सदस्य देशों के नेताओं के फैमिली फोटो सेशन के दौरान हुई, और सोशल मीडिया पर इसकी काफी चर्चा हुई। इंडिया टीवी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह पल क्षेत्रीय कूटनीति में भारत और रूस की मजबूत स्थिति को रेखांकित करता है।

कुल मिलाकर, यह समिट और मोदी-पुतिन की मुलाकात वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत-रूस संबंधों की मजबूती को मजबूत करती है। एससीओ जैसे मंच इन रिश्तों को और गहरा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।