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SCO शिखर सम्मेलन के दिशानिर्देशों पर सोमवार को मिलेंगे पीएम मोदी और पुतिनः क्रेमलिन सहायक

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाले हैं। यह बैठक चीन के तियानजिन शहर में चल रहे एससीओ समिट के दौरान होगी। क्रेमलिन के एक वरिष्ठ सहायक यूरी उशाकोव ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। यह खबर वैश्विक स्तर पर ध्यान खींच रही है क्योंकि दोनों देशों के बीच गहरे रिश्ते हैं। मोदी और पुतिन की यह मुलाकात न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर भी असर डालेगी।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया में कई बड़े बदलाव हो रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत और चीन जैसे देशों पर नए टैरिफ लगाए हैं, जो रूसी तेल आयात को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी, भारत और रूस अपने पुराने संबंधों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। एससीओ समिट में कई विश्व नेता शामिल हो रहे हैं, और यह आयोजन सुरक्षा, विकास और एकजुटता के मुद्दों पर केंद्रित है।

इस लेख में हम इस बैठक के हर पहलू को विस्तार से समझेंगे। हम एससीओ संगठन की पृष्ठभूमि, मोदी-पुतिन के संबंधों की इतिहास, समिट का एजेंडा, वैश्विक संदर्भ और भविष्य की संभावनाओं पर बात करेंगे। सब कुछ सरल भाषा में लिखा जाएगा ताकि आप आसानी से पढ़ सकें। हम विश्वसनीय स्रोतों से ली गई जानकारी का उपयोग करेंगे, जैसे कि सीएनएन, अल जजीरा, रॉयटर्स और विकिपीडिया। हम तालिकाओं का भी इस्तेमाल करेंगे जो महत्वपूर्ण डेटा को जल्दी दिखाएंगी। यह लेख विस्तृत है, लेकिन पाठक-अनुकूल तरीके से लिखा गया है, ताकि आप बिना थके पूरी जानकारी ले सकें। चलिए शुरू करते हैं।

एससीओ समिट क्या है?

एससीओ का पूरा नाम शंघाई सहयोग संगठन है। यह एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन है जो एशिया और मध्य एशिया के देशों को जोड़ता है। इसकी स्थापना 2001 में हुई थी, और इसका मुख्य लक्ष्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है। एससीओ की शुरुआत शंघाई फाइव के रूप में हुई थी, जिसमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान शामिल थे। बाद में यह विस्तारित होकर एक बड़ा संगठन बन गया।

2025 का एससीओ समिट चीन के तियानजिन शहर में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित हो रहा है। चीन इस वर्ष का मेजबान देश है, और समिट में 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसमें पूर्ण सदस्य देश जैसे भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। इसके अलावा, पर्यवेक्षक देश जैसे बेलारूस (जो अब पूर्ण सदस्य बन रहा है), मंगोलिया और अफगानिस्तान भी मौजूद हैं। यह समिट एससीओ की 25वीं वर्षगांठ का जश्न भी मना रहा है, जो संगठन की उपलब्धियों को हाइलाइट करेगा।

समिट का मुख्य विषय “शंघाई स्पिरिट को बनाए रखना: एससीओ आगे बढ़ रहा है” है। चीन ने 2025 को “एससीओ सतत विकास वर्ष” घोषित किया है, जो पर्यावरण-अनुकूल विकास पर फोकस करता है। यहां चर्चा के मुद्दे क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक कनेक्टिविटी, सतत विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन से जुड़े होंगे। एससीओ दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और इसका कुल जीडीपी वैश्विक जीडीपी का 20% से अधिक है। यह संगठन संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का समर्थन करता है और बहुपक्षीयवाद को बढ़ावा देता है।

एससीओ की ताकत इसकी विविधता में है। यह न केवल सुरक्षा मुद्दों पर काम करता है बल्कि व्यापार और निवेश को भी प्रोत्साहित करता है। उदाहरण के लिए, एससीओ ने हाल के वर्षों में आतंकवाद विरोधी अभ्यास और आर्थिक फोरम आयोजित किए हैं। तियानजिन समिट में तियानजिन घोषणा अपनाई जाएगी, जो संगठन की भविष्य की दिशा तय करेगी।

नीचे एक तालिका है जो एससीओ के मुख्य सदस्य देशों की जानकारी देती है। यह तालिका स्रोतों से ली गई है।

देश राजधानी एससीओ में शामिल होने का साल जनसंख्या (लगभग)
भारत नई दिल्ली 2017 1.4 अरब
रूस मॉस्को 2001 14.4 करोड़
चीन बीजिंग 2001 1.4 अरब
पाकिस्तान इस्लामाबाद 2017 24 करोड़
ईरान तेहरान 2023 8.8 करोड़
कजाकिस्तान अस्ताना 2001 1.9 करोड़

यह तालिका एससीओ की पहुंच को स्पष्ट करती है। ये देश मिलकर एक बड़ा क्षेत्र कवर करते हैं, जो यूरेशिया महाद्वीप का बड़ा हिस्सा है।

मोदी और पुतिन की बैठक का महत्व

मोदी और पुतिन की बैठक 1 सितंबर 2025 को एससीओ समिट के किनारे पर होगी। क्रेमलिन सहायक यूरी उशाकोव ने बताया कि यह बैठक व्लादिमीर पुतिन की दिसंबर 2025 में भारत यात्रा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है। यह भारत-रूस वार्षिक समिट का 23वां संस्करण होगा, जो दोनों देशों के बीच नियमित उच्च-स्तरीय संवाद को दर्शाता है।

यह बैठक भारत-रूस की विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगी। दोनों देश रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी सहयोग में गहराई से जुड़े हैं। उदाहरण के लिए, रूस भारत का प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ता है, और भारत रूस से कच्चा तेल आयात करता है। हाल ही में अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल आयात के लिए 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया है। लेकिन भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार रूस के साथ संबंध जारी रखेगा।

मोदी और पुतिन ने हाल ही में 8 अगस्त 2025 को फोन पर बात की थी। इस कॉल में उन्होंने यूक्रेन संकट पर चर्चा की, और मोदी ने शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की। पुतिन ने मोदी को भारत आने का न्योता स्वीकार किया, और दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जताई। यह बैठक एससीओ के मंच पर हो रही है, जो दोनों नेताओं को वैश्विक मुद्दों पर खुलकर बात करने का मौका देगी।

भारत-रूस संबंधों का महत्व वैश्विक अस्थिरता के समय में बढ़ जाता है। एससीओ जैसे प्लेटफॉर्म पर यह बैठक अन्य सदस्य देशों को भी संदेश देगी कि मजबूत द्विपक्षीय संबंध क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी हैं। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और निवेश जैसे विषयों पर फोकस होगा।

नीचे एक तालिका है जो मोदी-पुतिन की हाल की प्रमुख मुलाकातों को दर्शाती है। यह जानकारी स्रोतों से ली गई है।

तारीख जगह/माध्यम मुख्य विषय
8 अगस्त 2025 फोन कॉल यूक्रेन संकट, पुतिन की भारत यात्रा, द्विपक्षीय संबंध
जुलाई 2024 मॉस्को रक्षा सौदे, ऊर्जा आयात, आर्थिक सहयोग
सितंबर 2022 समरकंद आतंकवाद विरोध, व्यापार बढ़ावा, क्षेत्रीय सुरक्षा[आधारित विश्वसनीय स्रोत]

यह तालिका दिखाती है कि दोनों नेता नियमित रूप से मिलते हैं, जो उनकी साझेदारी की गहराई को उजागर करती है।

भारत-रूस संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत और रूस के संबंध सोवियत संघ के समय से मजबूत हैं। 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान सोवियत संघ ने भारत का समर्थन किया था, जो आज भी याद किया जाता है। 2000 में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी समझौता किया, जो 2010 में विशेष रणनीतिक साझेदारी में अपग्रेड हुआ। आज यह संबंध रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापार पर आधारित है।

रूस भारत को एस-400 मिसाइल सिस्टम जैसे उन्नत हथियार प्रदान करता है। ऊर्जा क्षेत्र में, भारत रूस से कच्चा तेल और गैस आयात करता है, जो 2024 में 65 अरब डॉलर के व्यापार का बड़ा हिस्सा था[आधारित स्रोतों पर]। यूक्रेन संकट के बाद भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ाया, जो सस्ता और विश्वसनीय स्रोत साबित हुआ।

एससीओ में भारत और रूस मिलकर काम करते हैं। वे आतंकवाद, ड्रग तस्करी और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग करते हैं। समिट में वे ग्रीन इकोनॉमी, एआई और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर भी चर्चा करेंगे। भारत की एससीओ सदस्यता 2017 से है, और रूस ने इसमें भारत का समर्थन किया था।

वैश्विक चुनौतियों के बीच यह संबंध स्थिरता प्रदान करता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, भारत ने रूस के साथ अपने रिश्ते बनाए रखे हैं, जो उसकी स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाता है।

नीचे एक तालिका है जो भारत-रूस व्यापार के प्रमुख आंकड़ों को दिखाती है। डेटा विश्वसनीय स्रोतों से है।

साल व्यापार मूल्य (अरब डॉलर) मुख्य निर्यात (भारत से) मुख्य आयात (रूस से)
2024 65 फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी तेल, उर्वरक, हथियार
2023 50 रसायन, वस्त्र हीरे, कोयला
2022 40 इलेक्ट्रॉनिक्स रक्षा उपकरण

यह तालिका व्यापार की वृद्धि को स्पष्ट करती है, जो दोनों देशों की आर्थिक निर्भरता को दिखाती है।

एससीओ समिट 2025 का एजेंडा

2025 समिट का एजेंडा सतत विकास और क्षेत्रीय सहयोग पर केंद्रित है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने समिट की मेजबानी की है, और उन्होंने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए एकजुटता पर जोर दिया है। मुख्य मुद्दे में राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान बढ़ाना शामिल है, जो पश्चिमी प्रतिबंधों का जवाब है।

समिट में तियानजिन घोषणा और एससीओ विकास रणनीति 2035 को अपनाया जाएगा। ये दस्तावेज सुरक्षा, आर्थिक एकीकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यावरण संरक्षण पर फोकस करेंगे। समिट द्वितीय विश्व युद्ध की 80वीं वर्षगांठ और संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 80वीं वर्षगांठ को भी याद करेगा, जो एससीओ की वैश्विक शांति में भूमिका को हाइलाइट करेगा।

बेलारूस इस समिट में पूर्ण सदस्य बन रहा है, जो संगठन का विस्तार दर्शाता है। नए डायलॉग पार्टनर जैसे देश भी जुड़ सकते हैं। एजेंडा में ई-कॉमर्स, स्मार्ट सिटी और नवीकरणीय ऊर्जा पर चर्चा होगी।

नीचे एक तालिका है जो समिट के प्रमुख एजेंडा बिंदुओं को विस्तार से दिखाती है।

एजेंडा बिंदु विवरण अपेक्षित परिणाम
क्षेत्रीय सुरक्षा आतंकवाद, साइबर खतरों और ड्रग तस्करी पर सहयोग संयुक्त अभ्यास और नीतियां
आर्थिक सहयोग कनेक्टिविटी, ई-कॉमर्स और निवेश नई समझौते और रणनीति 2035
सतत विकास ग्रीन इकोनॉमी, एआई और जलवायु परिवर्तन 2025 को सतत विकास वर्ष घोषित
सांस्कृतिक आदान-प्रदान शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक कार्यक्रम नए आदान-प्रदान कार्यक्रम

यह तालिका एजेंडा की गहराई को समझाती है, जो एससीओ को मजबूत बनाएगी।

वैश्विक संदर्भ में यह बैठक

यह बैठक वैश्विक अस्थिरता के समय में हो रही है। यूक्रेन संकट जारी है, और मोदी ने पुतिन से शांतिपूर्ण समाधान की अपील की है। अमेरिका के नए टैरिफ ने भारत और चीन को प्रभावित किया है, जो एससीओ सदस्यों को एकजुट कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल पर 25% टैरिफ लगाया, लेकिन एससीओ जैसे मंच इसकी काट ढूंढ रहे हैं।

मोदी की चीन यात्रा 2018 के बाद पहली है, जो भारत-चीन संबंधों में सुधार का संकेत है। पुतिन कई नेताओं से मिलेंगे, जिसमें 10 से अधिक द्विपक्षीय बैठकें शामिल हैं। एससीओ बहुपक्षीयवाद को बढ़ावा देता है, जो संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों से मेल खाता है।

नीचे एक तालिका है जो प्रमुख वैश्विक चुनौतियों को दिखाती है।

चुनौती प्रभावित क्षेत्र/देश एससीओ की भूमिका
यूक्रेन संकट रूस, यूक्रेन, यूरोप शांतिपूर्ण संवाद को बढ़ावा
अमेरिकी टैरिफ भारत, चीन, रूस वैकल्पिक व्यापार मार्ग
जलवायु परिवर्तन सभी एससीओ देश सतत विकास पहल

यह तालिका दिखाती है कि एससीओ इन मुद्दों पर एकजुट हो सकता है।

भविष्य की संभावनाएं

मोदी-पुतिन बैठक से भारत-रूस संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे। पुतिन की दिसंबर 2025 यात्रा नई परियोजनाएं लाएगी, जैसे ऊर्जा और रक्षा में सहयोग। एससीओ समिट से क्षेत्रीय एकीकरण बढ़ेगा, जो 2035 रणनीति के तहत होगा।

संगठन का विस्तार जारी रहेगा, और यह वैश्विक शांति में बड़ा रोल निभाएगा। भारत एससीओ में सक्रिय रहेगा, जो उसकी विदेश नीति को मजबूत करेगा।

नीचे एक तालिका है जो भविष्य की प्रमुख योजनाओं को दर्शाती है।

योजना समयसीमा मुख्य फोकस
पुतिन की भारत यात्रा दिसंबर 2025 द्विपक्षीय समिट, रक्षा और ऊर्जा
एससीओ विकास रणनीति 2035 तक आर्थिक एकीकरण और सुरक्षा
सतत विकास वर्ष 2025 पर्यावरण और विकास पहल

यह तालिका भविष्य की दिशा को स्पष्ट करती है।

मोदी और पुतिन की सोमवार की बैठक एससीओ समिट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भारत-रूस की मजबूत दोस्ती को दर्शाती है और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देगी। समिट से निकलने वाले फैसले वैश्विक स्थिरता में योगदान देंगे। दोनों नेता वैश्विक मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा करेंगे, जो दुनिया के लिए अच्छा संदेश है। यह बैठक न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी बल्कि एससीओ के सदस्य देशों को एकजुट करके वैश्विक चुनौतियों से निपटने की दिशा में कदम बढ़ाएगी।

इस समिट का महत्व इससे कहीं ज्यादा है। तियानजिन समिट एससीओ की 25वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा है और यहां 10 साल की विकास रणनीति अपनाई जाएगी, जो क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी, सतत विकास और एकजुटता पर फोकस करेगी। पुतिन ने समिट से पहले अमेरिका और यूरोपीय संघ के ‘भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों’ की आलोचना की है, जो ब्रिक्स देशों के विकास को बाधित करते हैं। उन्होंने कहा कि रूस और चीन इन प्रतिबंधों के खिलाफ एकजुट हैं और एससीओ एक निष्पक्ष बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था बनाने में योगदान देगा, जहां संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका होगी। मोदी की चीन यात्रा सात साल बाद हो रही है, जो भारत-चीन संबंधों में सुधार का संकेत देती है, खासकर सीमा मुद्दों पर। समिट में मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग जैसे नेताओं की मौजूदगी ‘शक्तिशाली दृश्य’ पैदा करेगी, जो अमेरिकी टैरिफ और ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ ग्लोबल साउथ की एकजुटता दिखाएगी।

समिट से निकलने वाली तियानजिन घोषणा और विकास रणनीति 2035 तक एससीओ को मजबूत बनाएगी, जिसमें आर्थिक एकीकरण, आतंकवाद विरोध और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर जोर होगा। भारत के लिए यह मौका अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को मजबूत करने का है, जहां वह रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा सहयोग जारी रखते हुए चीन के साथ सीमा तनाव कम कर सकता है। पुतिन की दिसंबर 2025 में भारत यात्रा इस बैठक की निरंतरता होगी, जो नई परियोजनाओं को जन्म देगी। कुल मिलाकर, यह समिट एससीओ को दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रीय संगठन के रूप में स्थापित करेगा, जो बहुपक्षीयवाद और निष्पक्ष वैश्विक व्यवस्था की दिशा में काम करेगा। हालांकि, सदस्य देशों के बीच मतभेद बने रह सकते हैं, जैसे तालिबान शासन पर अलग-अलग राय। फिर भी, ट्रंप के टैरिफ जैसे मुद्दों ने एससीओ को एकजुट होने का मौका दिया है, जो भविष्य में वैश्विक राजनीति को प्रभावित करेगा।