ब्लड मून चंद्र ग्रहण 2025: भारत में कब और कहाँ दिखेगा
पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। उस समय सूर्य की रोशनी सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। लेकिन पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की किरणों को मोड़ देता है। नीली रोशनी ज्यादा बिखर जाती है और लाल रंग की तरंगें आसानी से गुजरकर चंद्रमा तक पहुंचती हैं। इसी कारण ग्रहण के समय चंद्रमा गहरे लाल या तांबे जैसे रंग का दिखाई देता है। यही अद्भुत नजारा “ब्लड मून” कहलाता है। यह खगोलीय घटना प्राचीन काल से ही मानव समाज को आकर्षित करती आई है और इसे रहस्य, धर्म और विज्ञान से जोड़कर देखा जाता रहा है।
कब और कहाँ दिखाई देगा ग्रहण?
यह पूर्ण चंद्र ग्रहण 7–8 सितंबर 2025 की रात को होगा। इस बार यह ग्रहण विश्व की लगभग 85% आबादी को दिखाई देगा।
- पूरी तरह दिखाई देगा: भारत, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, चीन, जापान, थाईलैंड, इंडोनेशिया जैसे एशियाई देश, साथ ही पूर्वी अफ्रीका और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया।
- आंशिक रूप से दिखाई देगा: यूरोप और अफ्रीका के पश्चिमी हिस्सों में यह ग्रहण केवल आंशिक रूप में नजर आएगा क्योंकि उस समय वहाँ चंद्रमा क्षितिज पर उदय हो रहा होगा।
- नजर नहीं आएगा: उत्तर और दक्षिण अमेरिका में ग्रहण बिल्कुल दिखाई नहीं देगा, क्योंकि उस समय वहाँ दिन का उजाला होगा।
इसलिए भारतीय उपमहाद्वीप समेत एशिया के लोग इस दृश्य को सबसे अच्छे तरीके से देख पाएंगे।
ग्रहण का समय और अवधि
यह ग्रहण अपनी अवधि के कारण भी खास है।
- पूर्ण चरण की शुरुआत: 17:30 UTC (भारत में रात करीब 9:58 बजे)
- ग्रहण का चरम: 18:11 UTC (भारत में करीब 11:41 बजे)
- पूर्ण चरण का अंत: 18:52 UTC (भारत में रात लगभग 12:22 बजे)
- ग्रहण की कुल समाप्ति: 20:55 UTC (भारत में सुबह 1:27 बजे, 8 सितंबर को)
कुल मिलाकर 82 मिनट तक चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में रहेगा, जो इसे इस दशक का सबसे लंबा पूर्ण चंद्र ग्रहण बनाता है।
भारत और पड़ोसी देशों में दृश्यता
भारत में यह ग्रहण पूरे देश में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, बशर्ते मौसम साफ हो। कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, ढाका, काठमांडू और कोलंबो जैसे शहरों में लोग बिना किसी उपकरण के नंगी आंखों से इसे देख पाएंगे। नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में भी पूरा ग्रहण साफ नजर आएगा।
क्या चाहिए देखने के लिए?
सौर ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण देखने के लिए किसी विशेष सुरक्षा चश्मे या प्रोजेक्टर की जरूरत नहीं होती। इसे सुरक्षित रूप से नंगी आंखों, दूरबीन या छोटे टेलीस्कोप से देखा जा सकता है। केवल एक चीज आवश्यक है — साफ आसमान और खुला क्षितिज। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग इसे देख सकते हैं, हालांकि शहरों की रोशनी (light pollution) दृश्यता को प्रभावित कर सकती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट (Northern Ireland) के खगोल भौतिक विज्ञानी रायन मिलिगन बताते हैं कि ब्लड मून के लाल रंग का कारण पृथ्वी का वायुमंडल है। जब सूर्य की रोशनी वायुमंडल से गुजरती है, तो नीली किरणें ज्यादा बिखर जाती हैं और लाल किरणें मुड़कर चंद्रमा पर पहुंचती हैं। यही कारण है कि चंद्रमा रक्तिम दिखाई देता है।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
मानव सभ्यता में चंद्र ग्रहण को हमेशा से रहस्यमय घटना माना गया है। प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में इसे “चंद्र ग्रहण दोष” कहा गया और पूजा-पाठ का महत्व बताया गया। चीन, अफ्रीका और यूरोप की संस्कृतियों में भी इसे देवताओं या आत्माओं से जोड़ा गया। आधुनिक विज्ञान ने इन मान्यताओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ खगोलीय घटना है, लेकिन आज भी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएँ इससे जुड़ी रहती हैं।
भारत में ग्रहण के दौरान ‘सूतक काल’ माना जाता है, जिसमें पूजा, भोजन और कुछ धार्मिक कार्यों से परहेज़ किया जाता है। 7 सितंबर के ग्रहण के लिए भी यह परंपरा जारी रहेगी।
क्यों है यह ग्रहण खास?
- यह 2025 का आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण है।
- इसकी अवधि 82 मिनट है, जो इसे असाधारण बनाती है।
- यह एशिया और अफ्रीका के बड़े हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
- वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों के लिए यह अवलोकन और अध्ययन का बेहतरीन अवसर होगा।
भविष्य के ग्रहण
इसके बाद अगला पूर्ण चंद्र ग्रहण 3–4 मार्च 2026 को होगा। हालांकि वह ग्रहण एशिया, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा। लेकिन 2025 का यह ग्रहण अपनी व्यापक दृश्यता और लंबे समय तक चलने के कारण विशेष महत्व रखता है।
7–8 सितंबर 2025 की रात दुनिया भर में लाखों लोग आसमान में एक रहस्यमय और सुंदर दृश्य देख पाएंगे। लाल रंग से दमकता चंद्रमा मानव सभ्यता को एक बार फिर यह याद दिलाएगा कि प्रकृति कितनी अद्भुत और विस्मयकारी है। यह केवल खगोल विज्ञानियों के लिए ही नहीं, बल्कि आम जनता के लिए भी एक अनोखा अनुभव होगा।
जानकारी एकत्रित की जाती है Sciencealert and BBC.
