उत्तराखंड के देहरादून में बादल फटने से अचानक आई बाढ़, तपकेश्वर मंदिर जलमग्न
उत्तराखंड के देहरादून में सोमवार रात भारी बारिश के कारण बादल फटा, जिससे सहस्रधारा और टपोवन इलाकों में कई घर डूब गए और आईटी पार्क क्षेत्र में गंभीर जलभराव हुआ। अब तक कम से कम पांच लोगों के बह जाने की खबर है, जबकि शुरुआत में दो लोग लापता बताए गए थे, और चार मौतों की पुष्टि हुई है। शहर के विभिन्न हिस्सों में भूस्खलन हुआ, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए, तथा दुकानें और वाहन बह गए। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पीडब्ल्यूडी की टीमें बुलडोजरों के साथ बचाव कार्य में जुटी हैं, और अब तक 200 छात्रों समेत सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
सहस्रधारा इलाके में दुकानें, होटल और घर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, क्योंकि रात से हो रही मूसलाधार बारिश से करलीगाड़ नदी में अचानक बाढ़ आई। सोमवार रात की भारी बारिश से तमसा नदी उफान पर आ गई और शहर के प्रमुख धार्मिक स्थल तपकेश्वर महादेव मंदिर में पानी घुस गया। मंदिर के आंगन में पानी भर गया, हनुमान जी की मूर्ति तक पहुंच गया, और पानी का स्तर 10-12 फीट तक हो गया, हालांकि गर्भगृह सुरक्षित रहा। स्थानीय निवासियों ने बताया कि सुबह करीब 4:45 बजे पानी गुफा में घुसा और तेजी से बढ़ा, जिससे वे रस्सियों की मदद से बाहर निकले। मंदिर के पुजारी अचarya बिपिन जोशी ने कहा कि इतनी भयानक स्थिति लंबे समय से नहीं देखी गई, लेकिन कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ और लोगों को नदियों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
भारी बारिश के कारण देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर फन वैली और उत्तराखंड डेंटल कॉलेज के पास का पुल क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे यातायात बाधित हुआ और कई यात्री फंस गए। इसके अलावा, ऋषिकेश में चंद्रभागा नदी सुबह से उफान पर है, जिससे पानी राजमार्ग तक पहुंच गया और कई वाहन फंस गए। एसडीआरएफ की टीम ने नदी में फंसे तीन लोगों को सुरक्षित निकाला, जबकि अधिकारियों ने निवासियों को सूजन वाली नदियों और नालों से दूर रहने की चेतावनी दी है। देहरादून जिले में आईएमडी ने रेड अलर्ट जारी किया है, जिसमें भारी से बहुत भारी बारिश, गरज के साथ बिजली और तीव्र बारिश की भविष्यवाणी की गई है, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर स्थिति की विस्तृत जानकारी ली और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। इस बीच, मुख्यमंत्री धामी देहरादून जिले के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं, जहां उनके साथ स्थानीय विधायक और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी प्रभावित परिवार को परेशानी न हो, राहत सामग्री, सुरक्षित आश्रय, भोजन, पानी तथा स्वास्थ्य सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जाएं, और राज्य सरकार हर प्रभावित के साथ खड़ी है। जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने पुष्टि की कि बचाव टीमें रात से ही मौके पर हैं और दो लापता व्यक्तियों की तलाश जारी है।
हाल ही में, कुछ दिन पहले 5 अगस्त को उत्तरकाशी के धाराली क्षेत्र में भीषण बादल फटा था, जिससे विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन हुआ, घर, होटल और होमस्टे तबाह हो गए, कई लोग मारे गए और लापता हुए, साथ ही सड़कें तथा इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं। एनडीआरएफ और आईटीबीपी ने बचाव अभियान चलाया। इसी तरह, चमोली जिले के मोपता गांव में अगस्त में बादल फटने से एक घर और गोशाला क्षतिग्रस्त हुई, तथा 15-20 मवेशी दब गए। ये घटनाएं उत्तराखंड में मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती संख्या को दर्शाती हैं।
सहस्रधारा में बाढ़ का कहर
सहस्रधारा में बादल फटने से करलीगाड़ नदी में अचानक बाढ़ आई, जिसने आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई। कई घर डूब गए, आईटी पार्क क्षेत्र में पानी भर गया, और मालदेवता के पास एक प्रमुख पुल ढह गया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। दो लोग लापता हो गए थे, जिनके शव बाद में मिले, और कुल चार मौतें हुईं, जबकि कम से कम पांच लोग विभिन्न स्थानों से बह गए। स्थानीय निवासियों ने बताया कि पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि दुकानें, होटल और वाहन बह गए, तथा मलबा घरों और दुकानों में घुस गया। जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने पुष्टि की कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीडब्ल्यूडी की टीमें बुलडोजरों के साथ बचाव में लगी हैं, और रात में ही निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री धामी ने सहस्रधारा क्षेत्र की स्थिति पर विशेष चिंता जताई और कहा कि प्रशासन अलर्ट मोड में है।
तपकेश्वर महादेव मंदिर में पानी का स्तर 10-12 फीट तक पहुंचा
मंदिर में पानी सुबह 5 बजे से तेजी से बढ़ना शुरू हुआ, और स्थानीय लोगों ने एएनआई को बताया कि गुफा मंदिर में पानी 10-12 फीट तक पहुंच गया, जिससे शिवलिंग तक पानी आ गया। एक निवासी ने कहा कि वे किसी तरह रस्सियों की मदद से बाहर निकले, और पानी की तेज धारा से लकड़ियां बहकर आईं, जिससे मंदिर को काफी नुकसान हुआ। मंदिर पुजारी अचarya बिपिन जोशी ने कहा कि ऐसी स्थिति लंबे समय से नहीं देखी गई, लेकिन गर्भगृह सुरक्षित है और कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, साथ ही लोगों को नदियों के किनारे न जाने की सलाह दी। तपकेश्वर में एक व्यक्ति बह गया, जबकि कुछ फंसे लोगों को एसडीआरएफ ने बचाया। मंदिर परिसर में पानी हनुमान जी की मूर्ति तक पहुंचा, लेकिन संरचना मजबूत होने से मुख्य भाग सुरक्षित रहा।
बचाव कार्य और सरकारी कदम
बचाव टीमों ने अब तक 200 छात्रों को पानी से भरे संस्थान से निकाला है, 500 लोगों को प्रेमनगर के श्री देव भूमि संस्थान से निकाला गया, और रायपुर के पंचकुली में फंसे 30 लोगों को बचाने का कार्य जारी है। देहरादून जिले में कक्षा 1 से 12 तक सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं, और जिला मजिस्ट्रेट ने असुरक्षित क्षेत्रों में भूस्खलन तथा बाढ़ की संभावना को देखते हुए सतर्कता बरतने के आदेश दिए। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है और प्रशासन अलर्ट मोड में है, साथ ही केंद्र से मिली मदद से राहत कार्य तेज होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री से बात कर केंद्र की पूरी सहायता का वादा किया, जबकि गृह मंत्री शाह ने गृह मंत्रालय से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मसूरी और अन्य इलाकों से भी क्षति की खबरें हैं, और एक मौत की पुष्टि हो रही है।
ऋषिकेश में चंद्रभागा नदी का उफान
ऋषिकेश में चंद्रभागा नदी के बढ़ते जल स्तर से राजमार्ग प्रभावित हुआ, और पानी सड़क तक पहुंच गया। एसडीआरएफ ने तीन लोगों को बचाया, लेकिन कई वाहन अभी भी फंसे हैं, और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बारिश जारी रह सकती है, इसलिए नदियों से दूर रहें। नदी के किनारे बसे घरों और दुकानों में पानी घुसा, जिससे निवासियों को छतों पर शरण लेनी पड़ी। पुलिस और प्रशासन की टीमें रात भर बचाव में लगी रहीं, और डीएसपी संजीव सूद के नेतृत्व में कार्य जारी है।
अन्य प्रभावित क्षेत्र और पूर्व की घटनाएं
देहरादून के डीआईटी कॉलेज क्षेत्र में एक व्यक्ति बह गया और एक घायल हुआ, जबकि राजपुर शिखर फॉल्स के पास दो लोग लापता हैं। भगत सिंह कॉलोनी में एक व्यक्ति बह गया, और रिस्पना नदी पर तीन लोग फंसे हैं, जहां बचाव कार्य चल रहा है। मसूरी-देहरादून रोड पर मलबे से कई हिस्से अवरुद्ध हो गए, और पुलिस उन्हें साफ करने में जुटी है। ये घटनाएं उत्तराखंड में मानसून की आपदाओं की याद दिलाती हैं, जहां जून से अब तक हिमाचल प्रदेश में 404 मौतें हुई हैं, जिनमें से 229 बारिश से जुड़ी हैं। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है, राहत कार्य तेज कर रहा है, और निवासियों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
