U.S. President Trump ने पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार, 16 सितंबर 2025 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया और उनके 75वें जन्मदिन पर हार्दिक बधाई दी। यह फोन कॉल न केवल एक व्यक्तिगत इशारा था, बल्कि अमेरिका की ओर से भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक चुनौतियां बढ़ रही हैं।
पीएम मोदी ने इस कॉल के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की, जिसमें उन्होंने ट्रंप को धन्यवाद दिया और कहा कि वे दोनों ही भारत-अमेरिका की व्यापक और वैश्विक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। इसके अलावा, मोदी ने यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए ट्रंप के प्रयासों का खुलकर समर्थन किया, जो दोनों नेताओं के बीच मजबूत व्यक्तिगत और राजनयिक संबंधों को दर्शाता है।
फोन कॉल की पृष्ठभूमि और समय
यह फोन कॉल पीएम मोदी के जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले हुआ, जो 17 सितंबर को मनाया जाता है। ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस बातचीत का जिक्र करते हुए पोस्ट किया: “मैंने अभी-अभी अपने दोस्त, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शानदार फोन बात की। मैंने उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई दी! वे कमाल का काम कर रहे हैं। नरेंद्र: रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को खत्म करने में आपके समर्थन के लिए धन्यवाद!” ट्रंप ने इस संदेश को “राष्ट्रपति डीजेटी” के साथ समाप्त किया, जो उनके व्यक्तिगत स्टाइल को उजागर करता है और कॉल की अनौपचारिक लेकिन महत्वपूर्ण प्रकृति को दिखाता है।
दूसरी ओर, पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में जवाब दिया: “मेरे दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप, मेरे 75वें जन्मदिन पर फोन कॉल और गर्मजोशी भरी बधाई के लिए धन्यवाद। आपके जैसे ही, मैं भी भारत-अमेरिका की व्यापक और वैश्विक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं। हम यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए आपके प्रयासों का समर्थन करते हैं।” यह आदान-प्रदान दोनों नेताओं के बीच 2016 से चली आ रही दोस्ती को मजबूत करता है, जब ट्रंप पहली बार राष्ट्रपति बने थे और मोदी के साथ कई महत्वपूर्ण मुलाकातें हुई थीं, जैसे ह्यूस्टन में ‘हाउडी मोदी’ इवेंट।
भारत-अमेरिका संबंधों का विस्तार और महत्व
यह फोन कॉल भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग का एक और उदाहरण है। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में गहरा सहयोग विकसित किया है। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई थी, जिसमें क्वाड (क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग) का गठन शामिल है, जिसमें अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट्स (जैसे यूएस स्टेट डिपार्टमेंट की आधिकारिक वेबसाइट से) के अनुसार, 2025 तक दोनों देशों के बीच व्यापार 500 बिलियन डॉलर से अधिक पहुंच चुका है, जो 2016 के मुकाबले दोगुना है।
विशेषज्ञों, जैसे द हिंदू और न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषणों के आधार पर, यह कॉल वाशिंगटन की ‘रीसेट’ नीति का हिस्सा है, जिसमें भारत को एक प्रमुख साझेदार के रूप में देखा जा रहा है, खासकर चीन की बढ़ती चुनौतियों के सामने। मोदी और ट्रंप के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका भारत से रक्षा सौदों, जैसे ड्रोन और मिसाइल सिस्टम, में और निवेश की उम्मीद कर रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों ने कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन उत्पादन और वितरण में सहयोग किया था, जो उनकी साझेदारी की मजबूती को दिखाता है।
यूक्रेन संकट पर चर्चा और भारत की भूमिका
फोन कॉल का एक प्रमुख हिस्सा यूक्रेन-रूस युद्ध पर केंद्रित था। ट्रंप ने मोदी के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया, जबकि मोदी ने ट्रंप के शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों की सराहना की। भारत ने इस संकट में तटस्थ लेकिन रचनात्मक भूमिका निभाई है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स (यूएन की आधिकारिक वेबसाइट से) के अनुसार, भारत ने युद्ध की शुरुआत से ही बातचीत और कूटनीति की वकालत की है, और रूस के साथ अपने पुराने संबंधों को बनाए रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ संतुलन स्थापित किया है।
ट्रंप, जो 2024 चुनाव जीतकर दोबारा राष्ट्रपति बने हैं, ने यूक्रेन संकट को अपनी प्राथमिकता बनाया है। बीबीसी और रॉयटर्स की रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सीधी बातचीत की कोशिश की है, और भारत की मध्यस्थता इसमें मददगार साबित हो सकती है। मोदी ने पहले भी जी20 शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे पर आवाज उठाई थी, जहां उन्होंने कहा था कि “यह युद्ध का दौर नहीं है।” यह कॉल भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करता है, क्योंकि भारत रूस से तेल आयात करता है लेकिन अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी भी बनाए रखता है। हाल की घटनाओं में, भारत ने यूक्रेन को मानवीय सहायता प्रदान की है, जिसमें दवाइयां और चिकित्सा उपकरण शामिल हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से वितरित किए गए।
दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंध और ऐतिहासिक संदर्भ
ट्रंप और मोदी के बीच व्यक्तिगत संबंध काफी मजबूत हैं। 2019 में, ट्रंप ने अहमदाबाद में ‘नमस्ते ट्रंप’ इवेंट में हिस्सा लिया था, जहां लाखों लोग जमा हुए थे। यह संबंध न केवल राजनयिक हैं बल्कि व्यक्तिगत भी, जैसा कि ट्रंप के “माई फ्रेंड” जैसे शब्दों से झलकता है। पीएम मोदी, जो 17 सितंबर 1950 को जन्मे थे, ने अपने 75वें जन्मदिन पर यह बधाई प्राप्त की, जो उनके वैश्विक कद को दर्शाती है। मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक विकास में तेजी लाई है, और विश्व बैंक की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत 2025 में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
ट्रंप के लिए, यह कॉल उनकी विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें वे “अमेरिका फर्स्ट” को बनाए रखते हुए वैश्विक साझेदारियों को मजबूत कर रहे हैं। फॉक्स न्यूज और सीएनएन जैसी स्रोतों से पता चलता है कि ट्रंप भारत को एशिया में एक प्रमुख सहयोगी मानते हैं, खासकर साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में।
निष्कर्ष और आगे की संभावनाएं
यह फोन कॉल न केवल जन्मदिन की बधाई थी, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की पुष्टि भी। आने वाले समय में, दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर और करीब आ सकते हैं। पीएम मोदी के जन्मदिन पर यह इशारा उनके नेतृत्व की अंतरराष्ट्रीय मान्यता को उजागर करता है, और ट्रंप के साथ उनकी दोस्ती वैश्विक स्थिरता में योगदान दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदम से दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार और बढ़ेगा, जो लाखों नौकरियां पैदा कर सकता है।
