खबरें.दुनिया

ट्रंप ने यूरोपीय संघ से रूसी तेल खरीदारों पर 100% टैरिफ लगाने को कहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को यूरोपीय संघ (ईयू) से अनुरोध किया कि वह चीन और भारत से आयातित सामानों पर 100 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाए, ताकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बढ़ाया जा सके। यह रणनीति रूस की युद्ध मशीन को वित्तीय रूप से कमजोर करने के लिए है, जैसा कि रॉयटर्स द्वारा उद्धृत एक अमेरिकी अधिकारी और एक ईयू राजनयिक ने बताया। अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा, “रूसी युद्ध मशीन के लिए धन का मुख्य स्रोत चीन और भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद है। अगर आप इस धन स्रोत को लक्षित नहीं करेंगे, तो युद्ध को रोकना मुश्किल होगा।” यह अपील ऐसे समय में की गई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध दो साल से अधिक समय से चल रहा है, और पश्चिमी देश रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के नए तरीके तलाश रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का यह सुझाव ईयू के साथ समन्वित कार्रवाई पर आधारित है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है।

ट्रंप ने यह अनुरोध ईयू के प्रतिबंध दूत डेविड ओ’सुलिवन और अन्य यूरोपीय अधिकारियों के साथ एक कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान किया। ईयू का प्रतिनिधिमंडल इस हफ्ते वाशिंगटन में प्रतिबंधों पर समन्वय और सहयोग बढ़ाने के लिए चर्चा कर रहा है। ईयू राजनयिक ने बताया कि अमेरिका ने यह संकेत दिया है कि अगर ईयू इस योजना पर सहमत होता है, तो अमेरिका भी चीन और भारत पर समान टैरिफ लगाने के लिए तैयार है। राजनयिक ने इसे इस तरह समझाया, “वे कह रहे हैं कि हम यह कदम उठाएंगे, लेकिन आपको हमारे साथ मिलकर करना होगा।” यह चर्चा अमेरिका और ईयू के बीच लंबे समय से चल रहे सहयोग का हिस्सा है, जहां दोनों पक्ष रूस पर प्रतिबंधों को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग की एक हालिया रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि ईयू ने पहले ही रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन भारत और चीन जैसे देशों ने रूसी तेल को सस्ते दामों पर खरीदकर रूस की आय को बनाए रखा है। 2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने रूसी तेल आयात को 2021 के मुकाबले 10 गुना बढ़ाया, जो अब उसके कुल तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत है। इसी तरह, चीन रूस से सबसे अधिक तेल खरीदने वाला देश है, जो 2024 में 2 मिलियन बैरल प्रति दिन से अधिक पहुंच गया, जैसा कि इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) की रिपोर्ट में दर्ज है।

वाशिंगटन में हुई इन चर्चाओं का नेतृत्व ईयू की ओर से डेविड ओ’सुलिवन ने किया, जबकि अमेरिकी पक्ष से ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट, स्टेट डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारी और यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के सदस्य शामिल थे। यूक्रेन के प्रधानमंत्री भी इस वर्चुअल सत्र में जुड़े, जो युद्ध प्रभावित देश की भागीदारी को दर्शाता है। ट्रंप ने खुद दूर से इसमें हस्तक्षेप किया, जो उनकी विदेश नीति की सक्रियता को दिखाता है। एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने एएफपी को बताया कि यूएस सीनेट में एक विधेयक है, जिसमें 85 सह-प्रायोजक हैं, जो रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। हालांकि, अधिकारी ने सवाल उठाया कि क्या यूरोपीय संसद में इसे लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति मौजूद है। यह विधेयक, जिसे रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है, अगर पारित होता है तो वैश्विक व्यापार में बड़े बदलाव ला सकता है। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) के विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे टैरिफ अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन कर सकते हैं, जिससे भारत और चीन जैसे देशों के साथ विवाद बढ़ सकता है। सीएनएन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप की पिछली सरकार में भी इसी तरह के टैरिफ इस्तेमाल किए गए थे, जैसे कि स्टील और एल्यूमीनियम पर, जो भारत के साथ व्यापार युद्ध का कारण बने थे।

यह विकास रूस-यूक्रेन युद्ध के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है। फरवरी 2022 में शुरू हुए इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा कीमतों को बढ़ाया है, और पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस ने भारत और चीन जैसे साझेदारों के माध्यम से अपनी तेल निर्यात को बनाए रखा है। आईईए के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में रूस का तेल निर्यात 7.5 मिलियन बैरल प्रति दिन रहा, जिसमें से अधिकांश एशियाई बाजारों में गया। अमेरिका और ईयू का मानना है कि इन खरीदों को रोककर रूस की युद्ध क्षमता को कम किया जा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों जैसे कि ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे टैरिफ से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है, खासकर विकासशील देशों जैसे भारत के लिए, जहां ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख चिंता है। भारत ने बार-बार कहा है कि वह सस्ते तेल की खरीद से अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रख रहा है, और प्रतिबंधों का पालन करते हुए भी रूस से व्यापार जारी रखेगा।

‘अपने अच्छे दोस्त मोदी से बात करने का इंतजार कर रहा हूं’: ट्रंप

यह रिपोर्ट उस समय आई है जब ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से “आने वाले हफ्तों में” बात करने के लिए उत्सुक हैं। मोदी को “बहुत अच्छा दोस्त” बताते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच व्यापार बाधाओं को हल करने के लिए चल रही बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मुझे पूरा विश्वास है कि दोनों महान देशों के लिए एक सफल निष्कर्ष निकलेगा।” पीएम मोदी ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया दी और भारत-अमेरिका संबंधों पर समान सकारात्मक भावनाएं व्यक्त कीं। यह आदान-प्रदान दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चली आ रही व्यक्तिगत मित्रता को दर्शाता है, जो 2019 के “हाउडी मोदी” इवेंट जैसे कार्यक्रमों में स्पष्ट हुआ था।

ट्रंप की ये टिप्पणियां हाल ही में व्हाइट हाउस में दिए गए उनके बयानों के बाद आईं, जहां उन्होंने भारत के साथ संबंधों को “बहुत विशेष” बताया, लेकिन नई दिल्ली की कुछ नीतियों से अपनी असहमति जताई। इनमें व्यापार टैरिफ और बौद्धिक संपदा जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। पीएम मोदी ने गर्मजोशी से जवाब दिया और कहा कि वह ट्रंप की भावनाओं की “गहराई से सराहना करते हैं और पूरी तरह से पारस्परिक” हैं। यह प्रतिक्रिया भारत की कूटनीतिक शैली को दिखाती है, जो संबंधों को मजबूत रखने पर जोर देती है।

ये बयान भारत-अमेरिका संबंधों के मजबूत होते दौर में आए हैं। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 200 बिलियन डॉलर से अधिक पहुंच गया, जो 2019 के मुकाबले दोगुना है। प्रमुख क्षेत्रों में तकनीक, रक्षा और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं। हालांकि, विवाद बने हुए हैं, जैसे कि स्टील पर टैरिफ और जीएसपी (जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज) का निलंबन, जो ट्रंप की पिछली सरकार में हुआ था। एएफपी की रिपोर्ट में उल्लेख है कि मोदी और ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं, जो क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंचों में सहयोग को बढ़ावा देते हैं। हाल ही में, दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया है, जिसमें चिप निर्माण और एआई जैसे क्षेत्र शामिल हैं। वाशिंगटन पोस्ट के विश्लेषण के अनुसार, ट्रंप की वापसी से भारत-अमेरिका संबंध और मजबूत हो सकते हैं, लेकिन टैरिफ जैसे मुद्दों पर सतर्क रहना होगा।

इसके अलावा, ट्रंप की अपील भारत के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि रूस से तेल आयात उसकी ऊर्जा जरूरतों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पहले कहा है कि ऐसे प्रतिबंधों से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होगी। कुल मिलाकर, यह स्थिति वैश्विक कूटनीति में नए मोड़ ला सकती है, जहां अमेरिका अपने सहयोगियों को रूस के खिलाफ एकजुट करने की कोशिश कर रहा है।