एशिया कप 2025: पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने सूर्यकुमार यादव को दिया करारा जवाब
एशिया कप 2025 के फाइनल में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने क्रिकेट जगत को हिला दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर भारत टूर्नामेंट जीतता है तो कप्तान सूर्यकुमार यादव पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के चेयरमैन मोहसिन नकवी से विजेता ट्रॉफी लेने से इनकार कर सकते हैं, जो खेल की भावना और राजनीतिक मुद्दों के बीच के जटिल संबंध को उजागर करता है। यह घटना हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले की पृष्ठभूमि में देखी जा रही है, जहां भारतीय टीम ने अपनी एकजुटता दिखाई है।
पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के साथ भारतीय टीम की एकजुटता
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने एक पाकिस्तानी पत्रकार से बातचीत में स्पष्ट रूप से कहा, “खेल की भावना से ऊपर जीवन में कुछ चीजें होती हैं। हम पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के साथ खड़े हैं और यह जीत हमारे सशस्त्र बलों को समर्पित करते हैं।” यह बयान एशिया कप 2025 के फाइनल को हाल के वर्षों का सबसे विवादास्पद मैच बना सकता है, क्योंकि यह न केवल खेल के मैदान पर बल्कि ऑफ-फील्ड राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है। रविवार को खेले गए मैच में भारत ने पाकिस्तान को सात विकेट से हराया था, लेकिन मैच समाप्त होने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। यह कदम भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों में नए तनाव की शुरुआत माना जा रहा है। यादव ने टीम के इस फैसले का बचाव करते हुए विस्तार से समझाया कि यह पहलगाम हमले में मारे गए 26 लोगों के परिवारों के प्रति सम्मान और एकजुटता का प्रतीक था। इस हमले को पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों से जोड़ा गया है, जैसा कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट्स में उल्लेख किया गया है। उन्होंने आगे कहा, “हम यहां साथ आए, एक फैसला लिया और मुझे लगता है कि हमने खेल के माध्यम से सही जवाब दिया।” पीटीआई और अन्य विश्वसनीय स्रोतों जैसे द हिंदू से मिली जानकारी के अनुसार, पहलगाम हमला जम्मू-कश्मीर में बढ़ती आतंकी गतिविधियों का हिस्सा है, जिसमें पिछले कुछ वर्षों में कई निर्दोष नागरिकों की जान गई है। भारतीय टीम का यह स्टैंड न केवल भावनात्मक है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को भी सामने लाता है, जो क्रिकेट जैसे खेल को प्रभावित करते हैं।
पीसीबी की शिकायत और मैच रेफरी पर लगाए गए आरोप
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इस पूरी घटना से बेहद नाराज है और उन्होंने मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है। पीटीआई की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, पीसीबी ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (एसीसी) और इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पाकिस्तान टीम के मैनेजर नवेद चीमा ने भी एसीसी को अलग से शिकायत भेजी, जिसमें दावा किया गया कि पाइक्रॉफ्ट के निर्देशों की वजह से दोनों टीमों के कप्तानों के बीच मैच से पहले टीम शीट का पारंपरिक आदान-प्रदान नहीं हो सका। यह प्रक्रिया आमतौर पर मैच की शुरुआत में होती है और खेल की भावना को मजबूत करती है। पीसीबी की नाराजगी इस तथ्य से और बढ़ गई है कि मोहसिन नकवी वर्तमान में एसीसी के प्रमुख हैं, जबकि आईसीसी के चेयरमैन भारत के जय शाह हैं। ईएसपीएनक्रिकइंफो और बीबीसी स्पोर्ट जैसी विश्वसनीय वेबसाइटों की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ऐसे विवाद क्रिकेट प्रशासन में शक्ति संतुलन को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, आईसीसी के नियमों में हाथ मिलाने या अन्य प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने पर कोई स्पष्ट सजा नहीं है, लेकिन यह टूर्नामेंट की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। पाकिस्तानी मीडिया, जैसे डॉन न्यूज, ने इस घटना को भारत की ‘आक्रामक नीति’ के रूप में चित्रित किया है, जबकि भारतीय स्रोत इसे आतंकवाद के खिलाफ स्टैंड के रूप में देखते हैं।
भारतीय टीम का फैसला, बीसीसीआई का रुख और आंतरिक चर्चाएं
बीसीसीआई के सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि हाथ न मिलाने का फैसला टीम के वरिष्ठ खिलाड़ियों और मैनेजमेंट के बीच गहन चर्चा के बाद लिया गया, जिसमें हेड कोच गौतम गंभीर की प्रमुख भूमिका थी। गंभीर ने पहले सार्वजनिक रूप से कहा था, “भारतीय धरती पर आतंकी गतिविधियां जारी रहने तक पाकिस्तान के साथ कोई खेल संबंध नहीं होने चाहिए।” एक वरिष्ठ बीसीसीआई अधिकारी ने विस्तार से समझाया, “अगर कोई कानूनी बाध्यता नहीं है, तो भारतीय टीम को ऐसे विरोधी से हाथ मिलाने की जरूरत नहीं है, जिसके साथ ऐतिहासिक रूप से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं।” यह फैसला भारत में व्यापक बहस छेड़ रहा है। जहां एक तरफ विपक्षी राजनीतिक पार्टियां और सोशल मीडिया यूजर्स पाकिस्तान के खिलाफ खेलने की आलोचना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कई लोग इसे पीड़ित परिवारों के साथ एकजुटता का सशक्त संदेश मान रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट्स से पुष्टि होती है कि पहलगाम हमला हाल के महीनों में जम्मू-कश्मीर में हुए कई हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी आईएसआई की भूमिका पर आरोप लगे हैं। टीम के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, खिलाड़ी जैसे रोहित शर्मा और विराट कोहली (हालांकि वे इस टूर्नामेंट में नहीं खेल रहे) ने भी ऐसे फैसलों का समर्थन किया है, जो राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ, अंतरराष्ट्रीय उदाहरण और खेल में राजनीति का प्रभाव
खेल के इतिहास में राजनीतिक तनाव ने कई बार खेल को प्रभावित किया है। उदाहरण के लिए, 1970 के दशक में दक्षिण अफ्रीका की रंगभेद नीति के खिलाफ कई देशों ने क्रिकेट मैच खेलने से इनकार कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप दक्षिण अफ्रीका पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे। इसी तरह, 2023 में विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट में यूक्रेनी खिलाड़ी एलिना स्वितोलिना ने बेलारूस की विक्टोरिया अजारेंका से हाथ न मिलाने का फैसला किया, जो यूक्रेन-रूस युद्ध की पृष्ठभूमि में था, और उन्हें कोई सजा नहीं मिली। गार्जियन और रॉयटर्स जैसी अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ऐसे कदम खेल की भावना को चुनौती देते हैं लेकिन राष्ट्रीय मुद्दों को वैश्विक मंच पर लाते हैं। भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों का इतिहास भी विवादों से भरा है, जैसे 1999 कारगिल युद्ध के बाद मैचों का बहिष्कार। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट जैसे एशिया कप, विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी में भारत-पाकिस्तान मैच जारी रहेंगे, क्योंकि सरकारी नीतियां और आईसीसी के नियम इसे अनुमति देते हैं। भारत 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने वाला है और 2036 ओलंपिक गेम्स को अहमदाबाद में आयोजित करने की तैयारी कर रहा है, जो खेल को राजनीति से अलग रखने की चुनौती पेश करता है। हालांकि, पीटीआई की रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों टीमों के बीच पारंपरिक दोस्ती और सौहार्द की वापसी जल्दी नहीं होने वाली है, क्योंकि आतंकवाद जैसे मुद्दे लगातार प्रभावित करते रहेंगे।
फाइनल पर सबकी नजरें और संभावित परिणाम
एशिया कप 2025 अब 28 सितंबर के फाइनल की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जहां मैदान पर कड़ी टक्कर के अलावा ऑफ-फील्ड ड्रामा पर सबकी नजरें टिकी हैं। अगर भारत जीतता है, तो पीटीआई के सूत्रों के मुताबिक, प्रेजेंटेशन सेरेमनी में सूर्यकुमार यादव का मोहसिन नकवी से ट्रॉफी न लेना एक ऐतिहासिक घटना होगी, जो क्रिकेट के इतिहास में दर्ज हो सकती है। यह कदम न केवल खेल की राजनीतिक आयाम को उजागर करेगा बल्कि आईसीसी और एसीसी जैसे संगठनों को ऐसे विवादों से निपटने के लिए नए नियम बनाने पर मजबूर कर सकता है। आईसीसी के मौजूदा नियमों के अनुसार, ट्रॉफी स्वीकार करने या हाथ मिलाने जैसे प्रोटोकॉल पर कोई कठोर सजा नहीं है, लेकिन यह टूर्नामेंट की भावना और निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। क्रिकेट एनालिस्ट्स, जैसे कि हर्षा भोगले और इयान चैपल, ने अपने लेखों में (ईएसपीएनक्रिकइंफो पर उपलब्ध) ऐसे मामलों को ‘खेल की आत्मा पर हमला’ बताया है, लेकिन साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया है। कुल मिलाकर, यह घटना याद दिलाती है कि कुछ लड़ाइयों में क्रिकेट और राजनीति हमेशा एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं, और एशिया कप 2025 इसका जीता-जागता उदाहरण बन सकता है।
